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निवारक नजरबंदी किसे कहते हैं? निवारक निरोध कानून की क्या विशेषता है।

अगर आप निवारक नजरबंदी किसे कहते हैं और निवारक निरोध कानून की क्या विशेषता है तथा Preventive Meaning In Hindi में जानना चाहते हैं तो यह लेख इस चीज में आपकी मदद करेगा।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है की निवारक नजरबंदी कानून तभी प्रभावित हो सकता है जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

निवारक नजरबंदी किसे कहते हैं?

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जिस प्रक्रिया द्वारा अपराधी को अपराध करने से रोका जाता है उसे निवारक नजरबंदी कहते हैं इसमें अपराधी को दंडित नहीं किया जाता है बल्कि उसे पकड़ के कुछ दिनों के लिए जेल में नजरबंद कर दिया जाता है। 

सामान्यता निवारक नजरबंदी उन लोगों पर ही लागू होता है, जिसने कभी कोई बड़ा अपराध नहीं किया है लेकिन बड़ा अपराध करने के बारे में सोच रहा है इस तरह के व्यक्ति के बारे में पुलिस को खबर लगने पर पुलिस “ निवारक निरोध” कानून के तहत उस व्यक्ति को पकड़ के जेल में नजरबंद कर दिया जाता है।

निवारक नजरबंदी के तहत पुलिस किसी भी व्यक्ति को 90 दिनों से ज्यादा नजरबंद नहीं कर सकती। 

इस निवारक नजरबंदी के संपूर्ण प्रक्रिया में व्यक्ति को जेल में दंडित नहीं किया जाता है क्योंकि उसने कोई अपराध किया ही नहीं होता है।

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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 और 22(5) निवारक नजरबंदी का आधार है जिसके तहत व्यक्ति को स्वतंत्रता और सुरक्षा प्रदान की जाती है। 

निवारक नजरबंदी का मतलब क्या होता है?

निवारक नजरबंदी का मतलब ऐसी नजरबंदी होती है जो किसी बड़े समस्या या अपराध का निवारण करने में सक्षम हो वह भी बिना किसी व्यक्ति को दंडित किए।

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पुलिस अपने शक के आधार पर किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है वह भी बिना किसी वारंट के ताकि आने वाले समय में उस व्यक्ति द्वारा किए जाने वाले अपराध को रोका जा सके। 

कानून का उल्लंघन जैसे कि धोखाधड़ी और अपराध जनिक विश्वासघात इत्यादि समाज को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है इसलिए निवारक निरोध जरूरी है।

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निवारक निरोध एक कानून है जिसके तहत “ निवारक नजरबंदी” की प्रक्रिया होती है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट तक यह कानून लागू होती है।

निवारक निरोध कानून की विशेषता क्या है?

  • निवारक निरोध कानून बनाने की शक्ति केवल संसद के पास है।
  • निवारक निरोध कानून का उद्देश्य व्यक्ति को दंडित करना नहीं बल्कि समाज में होने वाले अपराधों को कम करना है।
  • निवारक नजरबंदी की प्रक्रिया में कोई मुकदमे और वारंट की जरूरत नहीं है।
  • निवारक नजरबंदी केवल उस व्यक्ति के लिए है जिसने अपराध ना किया हो लेकिन करने वाला है।
  • निवारक निरोध अधिनियम समाज  पर होने वाले बुरे प्रभाव से बचाता है।
  • दुनिया के किसी भी देश ने निवारक निरोध को संविधान के अभिन्न अंग के रूप में नहीं बनाया है जैसा कि भारत में किया गया है।

निवारक निरोध कानून सभी सामाजिक अपराधों पर लागू होता है जैसे, चोरी, डकैती, हत्या, अपहरण, शोषण, रिश्वतखोरी आदि।

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1980 में भारतीय सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अध्यादेश लाया जो बाद में जाकर कानून बना इसका मुख्य उद्देश्य भारत के आंतरिक समाज में होने वाले दंगों और अपराधों को रोकना था।

निवारक नजरबंदी के नुकसान

निवारक नजरबंदी कई बार सुर्खियों में रहता है क्योंकि जिस तरह यह समाज में होने वाले अपराध को कम करता है उसी प्रकार यह समाज में होने वाले अपराध को बरहा भी सकता है।

इसका इस्तेमाल कई बार नेता, अधिकारी अपने व्यक्तिगत दुश्मनी के लिए भी करते हैं क्योंकि इसमें गिरफ्तारी सिर्फ शक की बुनियाद पर किए जाते हैं।

समाज में निवारक नजरबंदी के कारण लोगों में और सुरक्षा की भावना होती है और उन्हें डर होता है कि हमें बिना किसी ठोस कारण के पुलिस गिरफ्तार कर सकती है।

यह कहीं कहीं पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों का हनन करता है क्योंकि कई बार ऐसा देखा गया है कि नेता अपने विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए निवारक नजरबंदी का उपयोग करते हैं और अपने खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए विरोध करने वाले व्यक्तियों को आकारण जेल में नजरबंद कर देते हैं।

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प्रश्न और उत्तर

निवारक नजरबंदी क्या है?

निवारक नजरबंदी एक प्रक्रिया है जिसके तहत पुलिस सिर्फ शक की बुनियाद पर किसी भी आदमी को गिरफ्तार कर सकता है और उसे जेल में 90 दिनों तक नजर बंद करके रख सकता है।

निवारक निरोध क्या होता है?

निवारक निरोध एक कानून है जिसके अंतर्गत राष्ट्र की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाता है और भविष्य में आने वाले मुश्किलों को कम किया जाता है।

निवारक नजरबंदी अधिकतम कितने समय के लिए हो सकती है

निवारक नजरबंदी अधिकतम 90 दिनों के लिए हो सकती है तत्पश्चात व्यक्ति को नजरबंदी से मुक्त करना ही होगा। 

निवारक नजरबंदी किस का आदेश होता है?

निवारक नजरबंदी का उपयोग करने के लिए पुलिस को किसी के आदेश की जरूरत नहीं है वह व्यक्तिगत शक के आधार पर किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है।

निवारक नजरबंदी का प्रयोग कब होता है?

यदि कोई व्यक्ति अपराध करने की योजना बना रहा है और पुलिस को उस पर शक हो जाता है तो उस परिस्थिति में पुलिस उस व्यक्ति को जेल में नजरबंद कर देता है और उसके ऊपर जांच चलाई जाती है।

निवारक नजरबंदी के तहत कौन से अपराध आते हैं?

समाज पर किसी भी प्रकार का बुरा प्रभाव डालने वाला अपराध जैसे चोरी, हत्या, डकैती, शोषण, रिश्वतखोरी इत्यादि सभी प्रकार के अपराधों में निवारक नजरबंदी का प्रयोग हो सकता है।

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निष्कर्ष

समाज में अपराधियों तथा अपराध को कम करने के लिए निवारक नजरबंदी को बनाया गया था और इसका उद्देश्य हमेशा देश के आंतरिक सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

हम आशा करते हैं आपको हमारी निवारक नजरबंदी किसे कहते हैं और निवारक निरोध कानून की क्या विशेषता है एवं निवारक नजरबंदी के नुकसान तथा Preventive Meaning In Hindi के ऊपर यह जानकारी आपको अच्छी लगी होगी।

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