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हिंदू धर्म का सबसे प्राचीन धर्म शास्त्र कौन सा है?

हिंदू धर्म का सबसे प्राचीन धर्म शास्त्र वेदों को माना गया है और वेदों में सबसे प्राचीन वेद शास्त्र ऋग्वेद को माना जाता है। हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन धर्म शास्त्र ऋग्वेद को महान महान ऋषि यों द्वारा लिखा गया है

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सबसे प्राचीन हिंदू धर्म शास्त्र ऋग्वेद के लेखक के रूप में गृत्समद, विश्वामित्र, वामदेव, अत्रि, भारद्वाज, वशिष्ठ आदि को जाना जाता है। जितने भी महान ऋषि हिंदू धर्म में हुए उन्होंने अपने अपने शक्तियों का प्रयोग कर वेदों की रचना की।

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हिंदू धर्म का दूसरा सबसे प्राचीन धर्म शास्त्र कौन सा है?

हिंदू धर्म का दूसरा सबसे प्राचीन धर्म शास्त्र यजुर्वेद है जिसकी रचना भी महान हिंदू धर्म से जुड़े हुए ऋषि मुनि के द्वारा की गई। यजुर्वेद में हिंदू धर्मों में की जाने वाली यज्ञ के विषय में संपूर्ण जानकारी दी गई है।

यजुर्वेद में ब्रह्मा, ईश्वर और आत्मा से जुड़ने के लिए विधि को बताई गई है और उनके पूजन हेतु सभी क्रियाओं के लिए मंत्रों को संग्रहित किया गया है।

 हिंदू प्राचीन धर्म शास्त्र क्रमानुसार इस प्रकार से है।

  1. ऋग्वेद
  2. यजुर्वेद
  3. सामवेद
  4. अथर्ववेद

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ऋग्वेद को लगभग 9000 , यजुर्वेद को 7000, सामवेद को 5000 और अथर्व वेद को लगभग 3000 ईसा पूर्व लिखा गया था।

हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन धर्म शास्त्र

हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन धर्म शास्त्र ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के अलावा भी कई ऐसे धर्मशास्त्र हैं जो अत्यंत महत्वपूर्ण है आइए इसे जानते हैं।

हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण प्राचीन धर्म शास्त्र के नाम

  • मनुस्मृति
  • दुर्गा सप्तशती
  • गरुड़ पुराण
  • महाभारत
  • गीता
  • रामचरितमानस

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इन सभी के अलावा भी हिंदू धर्म में कई सारे प्राचीन धर्म शास्त्र मौजूद है जिसकी सूची काफी लंबी है लेकिन जहां तक सबसे प्राचीन धर्मशास्त्र की बात है तो वह ऋग्वेद है।

हिंदू धर्म के प्राचीन शास्त्र की उपयोगिता 

हिंदू धर्म के प्राचीन शास्त्र की उपयोगिता के विषय में हम सभी जानते हैं लेकिन इसके महत्व को काफी कम लोग ही समझते हैं।

धर्मशास्त्र के अनुसरण से हमें भविष्य में आने वाली कठिनाइयों का अंदाजा होता है तथा हमें उनसे लड़ने की अदृश्य शक्ति मिलती है।

रामचरितमानस और महाभारत सभी प्रकार के ग्रंथों मैं हमने यह देखा है कि अंधता सच्चाई की जीत होती है और धर्म अधर्म पर विजय प्राप्त करता है।

यदि हम धर्मशास्त्र के नियमों का पालन करते हैं तो ईश्वर हमसे प्रसन्न रहते हैं और हमारे जीवन के हर पड़ाव में ईश्वर का साथ होता है।

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हिंदू प्राचीन शास्त्र मनुस्मृति को हिंदू धर्म का संविधान भी कहा जाता है जिसके माध्यम से हमें किस चीज का पालन करना चाहिए और किस चीज का नहीं इसका ज्ञान होता है।

हिंदू धर्म के प्राचीन शास्त्र को कब लिखा गया 

हिंदू धर्म को सबसे प्राचीन धर्म माना गया है क्योंकि इस धर्म के अंतर्गत आने वाले शास्त्र की रचना अत्यंत प्राचीन है।

  1. ऋग्वेद की रचना लगभग 9000 ईसा पूर्व हुई थी।
  2. यजुर्वेद की रचना लगभग 7000 ईसा पूर्व हुई थी।
  3. अथर्व वेद की रचना लगभग 5000 ईसा पूर्व हुई थी।
  4. सामवेद की रचना लगभग 3000 ईसा पूर्व हुई थी।

हिंदू धर्म के संविधान कहे जाने वाले मनुस्मृति की रचना 10000 ईसा पूर्व की गई जोकि ऋग्वेद की रचना से भी पहले है। मनुस्मृति में ऋषियों द्वारा पालन किए जाने वाले विचार लिखे गए हैं जो हर एक व्यक्ति को अपने जिंदगी में उतारने चाहिए।

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प्रश्न और उत्तर

हिंदू धर्म का सबसे प्राचीन शास्त्र किसे कहा जाता है?

हिंदू धर्म का सबसे प्राचीन शास्त्र मनुस्मृति और ऋग्वेद को कहा जाता है हालांकि ऋग्वेद को श्रेष्ठ रूप से माना जाता है क्योंकि ऋग्वेद मे लिखे गए शब्द स्वयं भगवान के शब्द है।

हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन शास्त्र की क्या विशेषता है?

हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन शास्त्र ऋग्वेद को कहा जाता है जिसकी सबसे खास विशेषता यह है कि यह सबसे प्राचीन है और इस में लिखे जाने वाले शब्द साक्षात परमात्मा के शब्द है।

हिंदू धर्म के शास्त्र की रचना किसने की?

हिंदू धर्म के शास्त्र की रचना गृत्समद, विश्वामित्र, वामदेव, अत्रि, भारद्वाज, वशिष्ठ आदि ऋषि द्वारा किया गया जो अत्यंत ज्ञानी थे।

सबसे अधिक प्रसिद्ध प्राचीन हिंदू धर्म शास्त्र कौन सा है?

सबसे अधिक प्रसिद्ध प्राचीन हिंदू धर्म शास्त्र श्रीमद्भगवद्गीता है जिसे स्वयं श्रीकृष्ण भगवान ने लिखा है।

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निष्कर्ष

हिंदू धर्म के सभी प्राचीन धर्म शास्त्र महत्वपूर्ण है जो लोगों को जीवन जीने की एक नई दिशा दिखाती है और हमें ईश्वर से जोड़ने का रास्ता दिखाती है।

हम आशा करते हैं आप को हमारे द्वारा हिंदू धर्म का सबसे प्राचीन धर्म शास्त्र कौन सा है के ऊपर यह जानकारी आपको अच्छी लगी होगी।

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