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शॉटकी दोष क्या है ? शॉटकी दोष के उदाहरण और विशेषताएं

आज हम लोग जानने वाले हैं कि शॉटकी दोष क्या है ( Schottky Dosh Kya Hai ) यानी शॉटकी दोष किसे कहते हैं इसकी परिभाषा क्या है? साथ ही हम इसकी विशेषताएं और इसके उदाहरण भी देखेंगे।

शॉटकी दोष का नाम एक लोकप्रिय और प्रसिद्ध जर्मन भौतिक विज्ञानी वाल्टर एच शॉटकी के नाम पर रखा गया है, उन्हें इस दोष की खोज के लिए 1936 में रॉयल सोसाइटी के ह्यूजेस पदक से भी सम्मानित किया गया था जो बहुत प्रसिद्ध है।

आइए अब जानते हैं शॉटकी दोष क्या है और इसके उदाहरण

शॉटकी दोष क्या है? Schottky Dosh Kya Hai

schottky dosh kya hai

शॉटकी दोष एक प्रकार का पॉइंट दोष है जो तब बनता है जब एक परमाणु क्रिस्टल के आंतरिक संरचना से निकलकर सतह के ऊपर आ जाता है तब उस जगह पर एक खाली स्थान बन जाता है जिसे शॉटकी दोष कहते हैं।

इसमें क्रिस्टल का घनत्व कम हो जाता है लगभग सभी तरह के कम घनत्व वाले क्रिस्टल में शॉटकी दोष पाया जाता है।

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शॉटकी दोष किसे कहते हैं?

जब किसी क्रिस्टल में विपरीत आवेशित आयन विद्युत तटस्थता बनाए रखने के लिए अपनी जगहों को छोड़ देते हैं जिससे रिक्तियों का निर्माण होता है एवं इसी रिक्त स्थान को शॉटकी दोष कहते हैं।

मॉडल आगे बताता है कि आसपास के परमाणु भी इन रिक्तियों पर कब्जा करने के लिए आगे बढ़ते हैं। आमतौर पर, जब दोष गैर-आयनिक क्रिस्टल में पाया जाता है तो इसे जाली रिक्ति शॉटकी दोष के रूप में जाना जाता है।

शॉटकी दोष के उदाहरण

वैसे तो शॉटकी दोष कि कई उदाहरण है लेकिन इन सब में से कुछ प्रमुख जिसका इस्तेमाल अधिक होता है।

शॉटकी दोष के निम्नलिखित उदाहरण है:-

  1. सोडियम क्लोराइड (NaCl)
  2. पोटेशियम क्लोराइड (KCl)
  3. पोटेशियम ब्रोमाइड (KBr)
  4. सीज़ियम क्लोराइड (CsCl)
  5. सिल्वर ब्रोमाइड (AgBr)

इनमें से शॉटकी दोष के दो मुख्य उदाहरण Nacl और Kcl है जिसका इस्तेमाल अधिक रूप से होता है।

शॉटकी दोष की विशेषता क्या है?

इसकी कुछ निम्नलिखित विशेषताएं जो आपको मालूम होना चाहिए:-

  • धनायन और ऋणायन के आकार में बहुत कम अंतर होता है।
  • धनायन और आयन दोनों ठोस क्रिस्टल छोड़ते हैं।
  • परमाणु भी क्रिस्टल से स्थायी रूप से बाहर निकल जाते हैं।
  • आम तौर पर दो रिक्तियां बनती है।
  • जहां तक ​​ठोस के घनत्व की बात है तो यह काफी कम हो जाता

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प्रश्न और उत्तर

शॉटकी दोष की परिभाषा?

जब किसी क्रिस्टल में विद्युत तटस्थता बनाए रखने के लिए समान संख्या में धनायन और आयन गायब होकर क्रिस्टल की सतह पर चले जाते हैं तब उस रिक्त स्थान को शॉटकी दोष कहते हैं।

शॉटकी दोष का निर्माण कब होता है?

जब एक परमाणु क्रिस्टल के अंदर से अपनी सतह पर चला जाता है, एक अलग रिक्ति को पीछे छोड़ देता है तब शॉटकी दोष का निर्माण होता है।

शॉटकी दोष किसमें पाया जाता है?

यह क्रिस्टल आयन में पाया जाता है जिससे क्रिस्टल आयन की घनत्व कम हो जाती है।

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निष्कर्ष : Schottky Dosh Kya Hai

दोस्तों यह जानकारी पूरी तरह से शॉटकी दोष क्या है ( Schottky Dosh Kya Hai ) और किसे कहते हैं तथा इसके उदाहरण और विशेषताओं पर केंद्रित था, मैं आशा करता हूं आपको हमारी यह जानकारी अच्छी लगी होगी।

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